स्वदेशी उत्पाद की खरीद कर देश को मजबूत करें

नो चायनीज उत्पाद-नो सिंगल यूज प्लास्टिक का आह्वान

तिब्बत-कैलाश मुक्ति का लिया संकल्प

भारत तिब्बत सहयोग मंच ने श्री टैगोर महाविद्यालय मे किया आह्वान

कुचामन सिटी। श्री टैगोर महाविद्यालय, झालरा रोड़, कुचामनसिटी मे *नो चायनीज उत्पाद – नो सिंगल यूज प्लास्टिक* कार्य-क्रम मे नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष लायन श्याम सुंदर मंत्री ने अपने उदबोधन मे विधार्थियों को भारतीय संस्कृति के बारे मे जानकारी देते हुए घर पर प्रातःकाल उठते ही माता-पिता को एवं विधालय में गुरू जनो को प्रणाम् करने हेतू प्रेरित करने के साथ ही दीपावली पर चाईनीज़ फटाके , लाइटिंग, डेकोरेशन आदि का बहिष्कार करने बाबत कहा। भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला अध्यक्ष श्याम सुंदर सैनी ने बताया कि तिब्बत भारत का मित्र व पडोसी देश एवं बोधधर्म को मानने वाला शान्ति प्रिय देश है। चीन ने तिब्बत एवं कैलाश मानसरोवर पर अवैध कब्जा कर रखा हैं। चीन के अवैध कब्जे से मुक्ति हेतू भारत तिब्बत सहयोग मंच का गठन 5 मई 1999 को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला मे किया गया था। चीन सदैव ही भारत से दुश्मनी रखता है और पाकिस्तान के साथ मिलकर आतंकवादी गतिविधियों को बढावा देता है। चायनीज सामान का सबसे बडा उपयोग कर्ता भारत हैं, चीन हमारे देश से ही कमाई करता हैं और इस कमाई का उपयोग हमारे ही देश के राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में करता है। अतः हमें चायनीज सामान का पूणतः बहिष्कार करना चाहिए, विशेष रूप से आगामी दीपावली पर दीपक तो मिट्टी के बने हुए ही जलाना है। इसके साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक आयटम जैसे:- पालीथीन बैग्स, कप्स, प्लेट्स, बाटल्स व विशेष प्रकार के पाऊच आदि जो एक बार उपयोग कर के फेंक दिये जाते है, जिससे नालियाँ अवरुद्ध होने से गन्दगी ओर मच्छरो से बिमारीया फैलती है, भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है, पशुओं की अकाल मृत्यु का कारण सिंगल यूज प्लास्टिक ही है,। तालाबों  नदियों व समुन्द्र के जीव-जन्तुओं का जीवन भी संकट मे पड रहा है ऐसी सामग्री पर पूर्णतया रोक लगाये जाने के लिए सरकार ने *प्लास्टिक-ना-बाबा-ना* अभियान का शुभारंभ गांधी जयंती 2 अक्टूबर से किया है, इसी क्रम में भारत तिब्बत सहयोग मंच भी चाईनीज सामान के बहिष्कार के साथ ही *नो चाईनीज उत्पाद-नो सिंगल यूज प्लास्टिक* हेतु जनजागरण अभियान चला रहा है। मंच की उपाध्यक्षा श्रीमती बरखा रानी जैन ने कहा कि चायनीज आर्टिफिशियल ज्वैलरी एवं सौंदर्य प्रसाधन की कीमत तो कम होती है लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते है। चर्मरोग इन्हीं सस्ते आईटम्स की देन है। जैन ने उपस्थित सभी विधार्थियों एंव विधालय स्टाफ को नो चायनीज उत्पाद-नो सिंगल यूज प्लास्टिक का संकल्प करवाया। मंच के कार्य कर्ता मनीष मोर ने उपस्थित सभी विधार्थियों व व्याख्याताओं एवं स्टाफ के तिब्बत-कैलाश मुक्ति संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर करवाये। महाविद्यालय के निदेशक सीताराम चौधरी, प्राचार्य बाबुलाल बुनकर, सह प्राचार्य अमित शर्मा, लायंस क्लब कुचामन सिटी के सचिव आशिष मंत्री, टैगोर बी.एड.कालेज के प्रिंसिपल बजरंग लाल बाजिया आदि ने भारत तिब्बत सहयोग मंच के अभियान का समर्थन करते हुए चीन की विस्तार वादी एवं दोहरी नीति की कडे़ शब्दों मे निन्दा की एवं उपस्थित सभी विधार्थियों व स्टाफ से चायनीज उत्पादन का पूणतः बहिष्कार करने की अपील की। मंत्री ने महाविद्यालय की सुव्यवस्थित प्रार्थना व अनुशासन एवं स्वच्छता के लिए निदेशक चौधरी का तिरंगा पिन लगाकर सम्मान किया। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओ द्वारा देश भक्ति एवं भारत माता के जयकारों के साथ ही कार्य क्रम सम्पन्न हुआ।