MY OWN SHERS

आसमां ख़ुद झुक जायेगा 
गर आसमां को छूना होते सिर्फ़ हाथ ऊँचे कर लेना
आसमां ख़ुद झुक जायेगा, फिर चाहे जो ले लेना
– प्रमोद कुमार शर्मा
 कैसे शुक्रिया अदा करूँ
 कैसे शुक्रिया अदा करूँ, आप गुरुजनों की दरिया दिली का
 बूँद की तलाश में आया था, दरिया बहा दिया आप ने ज्ञान का
– प्रमोद कुमार शर्मा
आदमी चिने हुए पत्थरों सा उदास है

इमारतों का कद बढ़ने हे क्या होगा, इंसानियत का कद गिरता जा रहा है

इमारतें आसमां से बातें कर रही हैं, आदमी चिने हुए पत्थरों सा उदास है

– प्रमोद कुमार शर्मा

 

वतन की मिट्टी के लिये

ये मुहिबे-वतन भी न जाने किस मिट्टी के बने होते हैं

वतन की मिट्टी के लिये खुद को मिट्टी में मिला देते हैं

— प्रमोद कुमार शर्मा

 

 

 

Post Author: pramod kumar sharma